बुधवार, 31 दिसंबर 2025

दिसंबर 2025, अंक 66

 



शब्द-सृष्टि

दिसंबर 2025, अंक 66

स्मृति शेष 

डॉ. योगेंद्रनाथ मिश्र : भाषा, संवेदना और आत्मीयता का अविस्मरणीय आलोक – डॉ. ऋषभदेव शर्मा

विनोद कुमार शुक्ल के न होने का अर्थ – डॉ. ऋषभदेव शर्मा

धर्मेन्द्र – राजा दुबे

विनोद कुमार शुक्ल – राजा दुबे

आलेख  

भारत में ग्रामीण रोजगार की नीति – सुरेश चौधरी

रामकथा में ‘लक्ष्मण-रेखा’ प्रसंग – श्रीराम पुकार शर्मा

विशेष

रमण रेती , रेती में लोटता है आस्था का सैलाब – डॉ. मोहन पाण्डेय ‘भ्रमर’

यमुना में भाई बहन का स्नान और दीप दान (मथुरा जी) – डॉ. मोहन पाण्डेय ‘भ्रमर’

ब्रज भूमि: भक्ति योग, ज्ञान योग और कर्म योग की त्रिवेणी – डॉ. मोहन पाण्डेय ‘भ्रमर’

काव्य

1.शब्दों की महिमा(ताटंक छंद) 2. रो पड़ा ख़ुद भी खुदा... (पूर्णिका) – डॉ. अनिल कुमार बाजपेई काव्यांश

1.नदी के किनारे 2. तुम जीत करके भी जीते नहीं हो – प्रेम नारायन तिवारी

देह गीत – दुष्यंत कुमार व्यास

यह जो ज़्यादा है! – आशीष दशोत्तर

लघुकथा

गुनाहगार कौन ? – रागिनी अग्रवाल 

वतन के लिए – प्रेम नारायन तिवारी

पुस्तक समीक्षा

किसकी परछाई – डॉ. घनश्याम बादल 

भारतीय भाषा दिवस का जादू फैलाने में सक्षम ‘जादूगर’ (जादूगर-रवि वैद) – डॉ. सुपर्णा मुखर्जी

‘धूप छाँव और इन्द्रधनुष’ कथा-संग्रह में जीवन की विविधरंगी अनुभूतियाँ – डॉ. सुषमा देवी

सामयिक टिप्पणी

महिलाएँ : भारत में विशालतम अल्पसंख्यक! – डॉ. ऋषभदेव शर्मा 


 

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दिसंबर 2025, अंक 66

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