शब्द-सृष्टि
दिसंबर
2025,
अंक 66
स्मृति
शेष
डॉ. योगेंद्रनाथ मिश्र : भाषा, संवेदना और आत्मीयता का अविस्मरणीय आलोक – डॉ. ऋषभदेव शर्मा
विनोद कुमार शुक्ल के न होने का अर्थ – डॉ. ऋषभदेव शर्मा
आलेख
भारत में ग्रामीण रोजगार की नीति – सुरेश चौधरी
रामकथा में ‘लक्ष्मण-रेखा’ प्रसंग – श्रीराम पुकार शर्मा
विशेष
रमण रेती , रेती में लोटता है आस्था का सैलाब – डॉ. मोहन पाण्डेय ‘भ्रमर’
यमुना में भाई बहन का स्नान और दीप दान (मथुरा जी) – डॉ. मोहन पाण्डेय ‘भ्रमर’
ब्रज भूमि: भक्ति योग, ज्ञान योग और कर्म योग की त्रिवेणी – डॉ. मोहन पाण्डेय ‘भ्रमर’
काव्य
1.शब्दों की महिमा(ताटंक छंद) 2. रो पड़ा ख़ुद भी खुदा... (पूर्णिका) – डॉ. अनिल कुमार बाजपेई काव्यांश
1.नदी के किनारे 2. तुम जीत करके भी जीते नहीं हो – प्रेम नारायन तिवारी
यह जो ज़्यादा है! – आशीष दशोत्तर
लघुकथा
गुनाहगार कौन ? – रागिनी अग्रवाल
वतन के लिए – प्रेम नारायन तिवारी
पुस्तक समीक्षा
किसकी परछाई – डॉ. घनश्याम बादल
भारतीय भाषा दिवस का जादू फैलाने में सक्षम ‘जादूगर’ (जादूगर-रवि वैद) – डॉ. सुपर्णा मुखर्जी
‘धूप छाँव और इन्द्रधनुष’ कथा-संग्रह में जीवन की विविधरंगी अनुभूतियाँ – डॉ. सुषमा देवी
सामयिक टिप्पणी
महिलाएँ : भारत में विशालतम अल्पसंख्यक! – डॉ. ऋषभदेव शर्मा

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