अमीर
खुसरो
1
नित
मेरे घर आवत है
रात
गए फिर जावत है
फसत
अमावस गोरी के फंदा
क्या
सखि साजन ? ना सखि चन्दा !
2
वो
आवै तो शादी होय
उस
बिन दूजा और न कोय
मीठे
लागे उसके बोल
ऐ
सखि साजन ? ना सखि ढोल !
भारतेन्दु
3
मुँह
जब लागे तब नहिं छूटे
जाति
मान धन सब कुछ लूटे
पागल
करि मोहिं करे खराब
क्यों
सखि साजन?
नहीं शराब !
त्रिलोक
सिंह ठकुरेला
4
जब-जब
आती दुःख से भरती
पति
के रुपये पैसे हरती
उसकी
आवक रास न आई
क्या
सखि, सौतन ? ना, महँगाई !
