नन्हे
कदम....नया साल!
डॉ.
पूर्वा शर्मा
पन्ना
पलटा.... कलैंडर में एक और नये वर्ष का आगमन!
कितनी
जल्दी बदल जाते हैं न! ये दिन-महीने और साल....। बीतता हुआ साल और अपने नन्हे कदम
रखता हुआ नया साल; दोनों में है कुछ ही पलों का फ़ासला और दोनों के ही पास है – अनगिनत
किस्से-कहानियाँ। लेकिन हम तो बस वही देखना-सुनना चाहते हैं जो हमें पसंद है। न
जाने क्यों जो खो दिया उसका गम हमें ज्यादा सताता है, इतना ज्यादा कि उसके चक्कर
में – जो पाया है, जिससे आनंद का अनुभव हुआ है उसे ही भूल जाते हैं, नज़र अंदाज कर
देते हैं। लेकिन नये वर्ष की नयी सुबह यह कहती है-याद दिलाती है कि अपने मन को भी
सूर्य की उजली किरणों के साथ एक नयी ऊर्जा से भर दो, रिक्त हो जाओ पुराने बोझ से
और क्षितिज पर चमकने के लिए हो जाओ फिर से तैयार। बीते साल में गुज़री सारी
बातों-घटनाओं को पीछे छोड़ते हुए भर दो अपने जीवन के पन्नों को चमकती हुई स्याही और
विविध रंगों से, और हाँ! स्वयं ही लिख दो अपनी कहानी, जो हम खुद चाहते हैं बस उसी
शब्द-उसी भाव से.... भर दो इस वर्ष के नये कलैंडर को। प्रकृति हमें सिखाती है कि पतझड़
के बाद ही तो बसंत आता है, तो बस.... यह नया वर्ष वही बसंत है जिसमें अनगिनत फूल
खिलने वाले हैं, जीवन में सुगंध बिखरने वाली है। अरे! अब तो सूर्य भी अपनी
चाल-अपना पथ परिवर्तित करके चलने लगा है तो क्यों न हम भी नये पथ पर नयी उमंग के
साथ चल दें। और हाँ! एस बात का खास ख्याल कि वक्त रुकता नहीं-टिकता नहीं....फिर से
कलैंडर के पन्ने पलटने से पहले ही कर लो पूरी अपनी सारी तमन्नाएँ और इससे पहले कि
बहुत देर हो जाए रँग दो इस जीवन के आसमान को अपने रंग में....! अस्तु!
पन्ना
बदला
खुद
की ही ज़ुबानी
लिख दे दास्ताँ!
डॉ.
पूर्वा शर्मा
वड़ोदरा

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