1
दुःख,
शोक, जब जो आ पड़े
सो
धैर्यपूर्वक सब सहो ।
होगी
सफलता क्यों नहीं
कर्तव्य
पथ पर दृढ़ रहो ।।
मैथिलीशरण
गुप्त
2
आदमी
मरने
के बाद
कुछ
नहीं सोचता।
आदमी
मरने
के बाद
कुछ
नहीं बोलता।
कुछ
नहीं सोचने
और
कुछ नहीं बोलने पर
आदमी
मर
जाता है।
उदय
प्रकाश
1
दुःख,
शोक, जब जो आ पड़े
सो
धैर्यपूर्वक सब सहो ।
होगी
सफलता क्यों नहीं
कर्तव्य
पथ पर दृढ़ रहो ।।
मैथिलीशरण
गुप्त
2
आदमी
मरने
के बाद
कुछ
नहीं सोचता।
आदमी
मरने
के बाद
कुछ
नहीं बोलता।
कुछ
नहीं सोचने
और
कुछ नहीं बोलने पर
आदमी
मर
जाता है।
उदय
प्रकाश
शब्द-सृष्टि जनवरी 2026, अंक 67 परामर्शक [प्रो. हसमुख परमार] की कलम से… संपादक [डॉ. पूर्वा शर्मा ] की ओर से.... – नन्हे कदम....नया साल! द...