शनिवार, 28 फ़रवरी 2026

कविता

 

मासूमियत

मीनू बाला

मासूमियत अपने आप में एक बहुत बड़ा गहना है।

बड़े खुश नसीब है वह लोग,जिसने इसको पहना है।

सुना है मासूम लोग भगवान को भी पसंद आते हैं,

चुस्त-चालाकियॉं करने वाले इस धरती पर धरे के धरे रह जाते हैं।

मासूम लोग ईश्वर द्वारा भेजे गए फ़रिश्ते माने जाते हैं,

जब हम इस धरती पर आते हैं तब बड़े ही मासूम गिने जाते हैं

जैसे-जैसे हम बड़े हो जाते हैं छल, कपट, निंदा,बुराई इन सब में ढल जाते हैं।

मासूमियत कहीं खो-सी जाती है और हम चुस्त-चालक गिने जाते हैं।

कितना अच्छा हो अगर वह मासूमियत बड़े होकर भी बनी रहे।

छोटी-छोटी बातों पर खुश होकर यह मुस्कान भी बचपन की तरह बनी रहे।

मासूमियत अपने आप में एक बहुत बड़ा गहना है।

बड़े खुश नसीब है वह लोग,जिसने इसको पहना है।

क्यों ना मासूमियत को फिर से अपनाया जाए?

        देख कर भी चुस्त चालाकियां को नासमझ बन जाया जाए।

                                     काश ! इसी बहाने हम भगवान को पसंद आ जाए,

हो सकता है इसी से हमारी जिंदगी खुशनुमा बन जाए।

क्यों ना दोस्त आज मासूम बन कर देख लिया जाए ?

क्यों ना दोस्त आज मासूम बन कर देख लिया जाए ?

सुना है -

मासूमियत अपने आप में एक बहुत बड़ा गहना है।

बड़े खुश नसीब है वह लोग,जिसने इसको पहना है।

***


मीनू बाला

हिंदी शिक्षिका 

चंडीगढ़


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