गुलाब
रागिनी अग्रवाल
देता
दृगों को ताजगी जल गुलाब का
मिठास
मुख में घोलता कंद गुलाब का
प्रीत
के प्रस्ताव का प्रतीक है गुलाब
प्रेयसी
को प्यारा लगे फूल गुलाब का
रद्दी
बनी किताब पर उसमें दबा हुआ
महक
रहा है अब तक पत्ता गुलाब का
होंठ
क्या हैं मानो पंखुड़ी गुलाब की
छाया
कपोल पर तेरे नूर गुलाब का
आँखों
के बीच पुतली लग रही है ऐसे
प्याली
में रखा जैसे जामुन गुलाब का
आप
आये तो हमें अहसास यह हुआ
हवा
में घुल गया हो जैसे इत्र गुलाब का
कर
हौसले बुलंद और देख उस तरफ
शूलों-मध्य हँस रहा चेहरा गुलाब का
रागिनी
अग्रवाल
कोटद्वार
पौड़ी गढ़वाल
उत्तराखंड


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