1.
अपना
अंबर
दुष्यंत
कुमार व्यास
हमने
देखा अपना अंबर, कितना खाली-खाली है।
कैसे टाँके चाँद-सितारे,
सारी सुइयाँ खाली हैं।
वशिष्ठ-अरुंधति
हमसे रुठे,
ध्रुव
तारा भी पास नहीं,
दूर-दुधिया
पथ था प्यारा।
उसकी
कोई आस नहीं।
गुरु-मंगल
दोनों अनबोले, शनि तो एक पहेली है।
कैसे टाँके चाँद-सितारे ,
सारी सुइयाँ खाली हैं।।
रात-रात
भर गिनते तारे,
सोते
उनकी छाँव तले।
दो
बाहों के आलिंगन में,
खो
जाते हम रात ढले।
कमल
तंतु भी आ जा पाएँ, इतनी जगह न खाली है।
कैसे टाँके चाँद-सितारे
,
सारी सुइयाँ खाली हैं।।
तेरा तारा , मेरा तारा,
तारों
का बस जाल बुना।
उसमें
अपना तारा चुनते,
जीवन
का संग्राम चुना।
हम
ने कैसा सपना देखा , कैसी देखी बदली है।
कैसे टाँके
चाँद-सितारे , सारी सुइयाँ खाली है।।
यह
जो दिन है सूरज उसमें,
लगता
सब पर भारी है।
सारे
चाँद -सितारे छुपते,
उसकी
ही बदमाशी है।
वह
चाहे उसका ही शासन,करें उसी की जय-जय है।
कैसे टाँके
चाँद-सितारे ,
सारी सुइयाँ खाली है।।
***
2.
सत्या
का गौरा पूजन
मौन कहे
कुछ मौन से , मौन सुने रह मौन।
मौन
पिया के मन बसा,तब मुखरित हो मौन।।
देख रहा मूँदे नयन , तन
अद्भुत व्यापार।
जिसकी
जैसी साधना,वैसा उसको प्यार।।
सतरंगी साड़ी
पहन , माथे पर सिन्दूर।
सूरज
पूजन को चली ,संग सखी भरपूर।।
प्रेम
-पत्र प्रेषित किया, पंडित को समझाय।
इतना कहना
कान्ह से , पत तेरी ही जाय।।
रहूँ सुहागन
मैं सदा,
पूंजूँ गौरी मात।
शिव
जैसा औढ़र मिले, दे माता सौगात।।
कैसा
उसका प्रेम है ,
कैसी उसकी चाह।
शव
काँधे लेकर फिरा, मुख से करी न आह।।
ऐसा दुल्हा
चाहती, बाबुल को संदेश।
उसकी
आधी देह में, मेरा
हो परिवेश।।
नहीं राज्य की कामना, रानी
पद बेकार।
जहाँ
बसे है साँवरा, वह
मेरी सरकार।।
दुष्यंत
कुमार व्यास
सेवानिवृत्त
वरिष्ठ प्राध्यापक गणित
शिव-हनुमान
मंदिर के सामने,
गली
नंबर 6,
कस्तूरबा नगर
रतलाम
(मध्यप्रदेश)- 457001



Wah .. bahut badhiya 👌👌
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर
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