नई
सुबह
डॉ. राजकुमार शांडिल्य
नीरस
जीवन में भी, भर जाता है रंग।
नूतन
की चाह में, साहस और उमंग।।
ब्रह्म
मुहूर्त में जाग, पशु-पक्षी, मानव।
नई
ऊर्जा से,
दिनचर्या में हैं जुट जाते।।
प्रात:
स्वच्छ नीले नभ में चमकते तारे।
क्षितिज
में लालिमा से सूर्य की आरती उतारे।।
तेज-पुंज,
जीवनदाता, नई सुबह लाता।
सूर्यदेव,
जड़ चेतन का पिता कहलाता।।
नित्य
भोर में सूर्य देता चलने का संदेश।
कभी
न रुकना,
तभी आगे बढ़ेगा देश।
आलस्य
त्याग से ही सदा रहता स्वस्थ तन।
कर्मठता
से ही वश में रहे चंचल मन।।
प्रात:
बर्फ से ढकी रजताभ चोटियाँ।
सूर्य
किरणों से सबका मन मोह लेती।।
नदी-तीर
बहती मन्द, सुगन्ध समीर।
घने
पेड़ों में, कर्णप्रिय खग कलरव।।
खेतों
में,
बैलों की घंटियों का संगीत है भाता।
तभी
जीवों को अन्न-फल-दूध मिल पाता।।
ओस
की बूँदें, फसलों पर हैं लहराती।
प्रात:
मोती - सी मनमोहक, भू को सजाती।।
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डॉ.
राजकुमार शांडिल्य
हिन्दी
प्रवक्ता
शिक्षा
विभाग,
चंडीगढ़

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