माँ
प्रेम
नारायन तिवारी
माँ
तेरी याद ऐसी सताई मुझे,
माँ-माँ
कहके रो,
मुस्कुराने लगा।
लेटे
बिस्तर पर निंदिया न आई मुझे,
लोरी
गा-गा के खुद को सुलाने लगा।।
जब
सुबह होती थी, पास आती थी तुम,
नरम
हाथों से मुझको, जगाती थी तुम,
सटी
पलकों को आँचल भिगोकर के तुम,
तब
छुड़ाती थी, मैं अब सटाने लगा।
माँ
तेरी याद ऐसी सताई मुझे,
माँ-
माँ कहके रो मुस्कुराने लगा।।
याद
मुझको अभी तक, जमाना वो माँ,
मारकर
के भी खाना खिलाना वो माँ,
मेरी
आँखों मे आँसू दिखा गर तुम्हें,
तुम
तो रोती थी तब, अब रुलाने लगा।
माँ
तेरी याद ऐसी सताई मुझे,
माँ-
माँ कहके रो मुस्कुराने लगा।।
मुझको
बचपन में निंदिया न आती थी जब,
देकर
थपकी तू लोरी सुनाती थी तब
बात
अब तक न भूली मुझे याद है,
थपकियाँ
देकर खुद को सुलाने लगा।
माँ
तेरी याद ऐसी सताई मुझे,
माँ-माँ
कह के रो,
मुस्कुराने लगा।।
प्रेम
नारायन तिवारी
रुद्रपुर देवरिया


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