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फरवरी 2026, अंक 68
शब्द-सृष्टि फरवरी 2026, अंक 68 मुक्तक – नव संवत्सर – डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा कविता – बसंत राग – दुष्यन्त कुमार व्यास कविता – 1. कुटुंब (आ...
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प्रो. हसमुख परमार शब्दसृष्टि का 67वाँ और वर्ष 2026 का प्रथम अंक , एक सामान्य अंक। सामान्य इस अर्थ में कि भाषा , साहित्य व समीक्षा क्ष...
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इंद्र कुमार दीक्षित 1. महाप्राण निराला हे वसन्त के अग्रदूत! तुम अजस्र स्वर बन वीणा के बजते रहे , काव्य मंचों पर और ढुलकते रह...
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ख़ामोशी प्रीति अग्रवाल कैसे कह दूँ तुम ही ग़लत थे बीच हमारे फासले बहुत थे कहती रही नयनों से अपने जी की बतियाँ सारे...

बहुत ही सुंदर व सार्थक अंक I रच रच कर हर एक विधा को करीने से सजाया है अपने .I हाइकु हाइगा लघुकथा सभी का उम्दा चयन किया अपने-.I आपकी कविता मन को आनंदित कर गयी पुस्तक समीक्षा भी बहुत अच्छा है. I आपकी शब्द सृष्टि गागर में सागर है I आपको सार्थक सृजन की असीम शुभकामनायें I -कंचन अपराजिता
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