शनिवार, 28 फ़रवरी 2026

कविता


गुलाब

रागिनी अग्रवाल

देता दृगों को ताजगी जल गुलाब का

मिठास मुख में घोलता कंद गुलाब का

 

प्रीत के प्रस्ताव का प्रतीक है गुलाब

प्रेयसी को प्यारा लगे फूल गुलाब का

 

रद्दी बनी किताब पर उसमें दबा हुआ

महक रहा है अब तक पत्ता गुलाब का

 

होंठ क्या हैं मानो पंखुड़ी गुलाब की

छाया कपोल पर तेरे नूर गुलाब का

 

आँखों के बीच पुतली लग रही है ऐसे

प्याली में रखा जैसे जामुन गुलाब का

 

आप आये तो हमें अहसास यह हुआ

हवा में घुल गया हो जैसे इत्र गुलाब का

 

कर हौसले बुलंद और देख उस तरफ

शूलों-मध्य हँस रहा चेहरा गुलाब का


रागिनी अग्रवाल

कोटद्वार पौड़ी गढ़वाल

उत्तराखंड

 

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