शनिवार, 31 जनवरी 2026

कविता

नई सुबह

डॉ. राजकुमार शांडिल्य

नीरस जीवन में भी, भर जाता है रंग।

नूतन की चाह में, साहस और उमंग।।

ब्रह्म मुहूर्त में जाग, पशु-पक्षी, मानव।

नई ऊर्जा से, दिनचर्या में हैं जुट जाते।।

प्रात: स्वच्छ नीले नभ में चमकते तारे।

क्षितिज में लालिमा से सूर्य की आरती उतारे।।

तेज-पुंज, जीवनदाता, नई सुबह लाता।

सूर्यदेव, जड़ चेतन का पिता कहलाता।।

नित्य भोर में सूर्य देता चलने का संदेश।

कभी न रुकना, तभी आगे बढ़ेगा देश।

आलस्य त्याग से ही सदा रहता स्वस्थ तन।

कर्मठता से ही वश में रहे चंचल मन।।

प्रात: बर्फ से ढकी रजताभ चोटियाँ।

सूर्य किरणों से सबका मन मोह लेती।।

नदी-तीर बहती मन्द, सुगन्ध समीर।

घने पेड़ों में, कर्णप्रिय खग कलरव।।

खेतों में, बैलों की घंटियों का संगीत है भाता।

तभी जीवों को अन्न-फल-दूध मिल पाता।।

ओस की बूँदें, फसलों पर हैं लहराती।

प्रात: मोती - सी मनमोहक, भू को सजाती।।

***

डॉ. राजकुमार शांडिल्य

हिन्दी प्रवक्ता

शिक्षा विभाग, चंडीगढ़


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