शनिवार, 31 जनवरी 2026

कविता

 


1.

अपना अंबर

दुष्यंत कुमार व्यास

 

हमने देखा अपना अंबर, कितना खाली-खाली है।

कैसे  टाँके चाँद-सितारे, सारी  सुइयाँ खाली  हैं।

 

वशिष्ठ-अरुंधति हमसे रुठे,

ध्रुव तारा भी पास नहीं,

दूर-दुधिया पथ था प्यारा।

उसकी कोई आस नहीं।

 

गुरु-मंगल दोनों अनबोले, शनि तो एक पहेली है।

कैसे  टाँके चाँद-सितारे , सारी  सुइयाँ खाली हैं।।

 

रात-रात भर गिनते तारे,

सोते उनकी छाँव तले।

दो बाहों के आलिंगन में,

खो जाते हम रात ढले।

 

कमल तंतु भी आ जा पाएँ, इतनी जगह न खाली है।

कैसे  टाँके  चाँद-सितारे , सारी  सुइयाँ खाली  हैं।।

 

तेरा  तारा , मेरा  तारा,

तारों का बस जाल बुना।

उसमें अपना तारा चुनते,

जीवन का संग्राम चुना।

 

हम ने कैसा सपना देखा ,  कैसी देखी बदली है।

कैसे  टाँके  चाँद-सितारे , सारी सुइयाँ खाली है।।

 

यह जो दिन है सूरज उसमें,

लगता सब पर भारी है।

सारे चाँद -सितारे छुपते,

उसकी ही बदमाशी है।

 

वह चाहे उसका ही शासन,करें उसी की जय-जय है।

कैसे  टाँके  चाँद-सितारे  , सारी सुइयाँ खाली  है।।

***


2.

सत्या का गौरा पूजन

 

मौन  कहे  कुछ मौन से , मौन सुने रह मौन।

मौन पिया के मन बसा,तब मुखरित हो मौन।।

 

देख  रहा मूँदे नयन , तन अद्भुत व्यापार।

जिसकी जैसी साधना,वैसा उसको प्यार।।

 

सतरंगी  साड़ी  पहन , माथे पर सिन्दूर।

सूरज पूजन को चली ,संग सखी भरपूर।।

 

प्रेम -पत्र प्रेषित किया, पंडित को समझाय।

इतना  कहना  कान्ह से , पत तेरी ही जाय।।

 

रहूँ  सुहागन  मैं  सदा, पूंजूँ  गौरी  मात।

शिव जैसा औढ़र मिले, दे माता सौगात।।

 

कैसा उसका  प्रेम है , कैसी  उसकी  चाह।

शव काँधे लेकर फिरा, मुख से करी न आह।।

 

ऐसा  दुल्हा  चाहती, बाबुल को संदेश।

उसकी आधी देह में, मेरा  हो  परिवेश।।

 

नहीं  राज्य की कामना, रानी पद बेकार।

जहाँ बसे है साँवरा, वह  मेरी  सरकार।।

 ***

दुष्यंत कुमार व्यास

सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्राध्यापक गणित

शिव-हनुमान मंदिर के सामने,

गली नंबर 6, कस्तूरबा नगर

रतलाम (मध्यप्रदेश)- 457001


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