बुधवार, 31 दिसंबर 2025

आलेख


 

भारत में ग्रामीण रोजगार की नीति :

SGRY से NREGA, MGNREGA और VB-G RAM G तक

योजना, अधिकार और आजीविका का विकासक्रम

सुरेश चौधरी

भूमिका

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था लंबे समय तक मौसमी बेरोज़गारी, अल्प-आय, भुखमरी और असुरक्षा से ग्रस्त रही है। स्वतंत्रता के बाद अनेक विकास योजनाएँ बनीं, परंतु रोज़गार को राज्य की बाध्यकारी जिम्मेदारी मानने में देश को काफी समय लगा।

ग्रामीण रोजगार नीति का वास्तविक इतिहास तीन स्पष्ट चरणों में विकसित होता है—

राहत एवं योजना आधारित रोजगार

कानूनी अधिकार आधारित रोजगार-गारंटी

रोज़गार से आगे—आजीविका, कौशल और उत्पादकता

इन चरणों का प्रतिनिधित्व करती हैं—

SGRY NREGA MGNREGA VB-G RAM G

 

1. संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (SGRY), 2001

— योजना आधारित पहला ठोस प्रयास

आरम्भ और पृष्ठभूमि

25 सितंबर 2001 को अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने

 संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (Sampoorna Grameen Rozgar Yojana) प्रारंभ की।

यह वह समय था जब—

ग्रामीण क्षेत्रों में भुखमरी और बेरोज़गारी साथ-साथ मौजूद थीं

खाद्य सुरक्षा और रोजगार को अलग-अलग देखना संभव नहीं रह गया था

 

SGRY की मूल अवधारणा

SGRY का केंद्रीय विचार था—

“काम के बदले मजदूरी और भोजन”

यह स्वीकारोक्ति थी कि ग्रामीण गरीब के लिए रोजगार केवल आय का प्रश्न नहीं, जीवन निर्वाह का प्रश्न है।

 

मुख्य प्रावधान

रोजगार : अकुशल श्रम आधारित सार्वजनिक कार्य

मजदूरी :

आंशिक नकद

आंशिक अनाज (गेहूँ/चावल)

क्रियान्वयन :

ग्राम पंचायत एवं जिला प्रशासन

सीमाएँ

रोजगार की कोई कानूनी गारंटी नहीं

काम की उपलब्धता सरकार पर निर्भर

अनाज वितरण में लीकेज और देरी

श्रमिक अधिकारधारी नहीं, केवल लाभार्थी

➡️ SGRY ने समस्या को पहचाना, पर समाधान को अधिकार का रूप नहीं दे सकी।

2. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA), 2005

— रोजगार एक कानूनी अधिकार

ऐतिहासिक परिवर्तन

2005 में भारत ने ग्रामीण नीति में निर्णायक मोड़ लिया।

पहली बार—

रोजगार को योजना नहीं

सहायता नहीं

बल्कि कानूनी अधिकार घोषित किया गया।

यहीं से अस्तित्व में आया—

National Rural Employment Guarantee Act (NREGA), 2005

🔹 लागू : 2 फ़रवरी 2006

 🔹 स्वरूप : अधिनियम (Act), न कि केवल योजना

NREGA की ऐतिहासिक विशेषताएँ

प्रत्येक ग्रामीण परिवार को :

100 दिनों का रोजगार—कानूनी गारंटी

यदि रोजगार न मिले :

बेरोज़गारी भत्ता

व्यवस्था :

माँ ग आधारित (काम माँगने पर देना अनिवार्य)

भुगतान :

पूर्णतः नकद, बैंक/डाक खाते में

👉 NREGA ने गरीब को पहली बार “लाभार्थी” से “अधिकारधारी नागरिक” बनाया।

संवैधानिक महत्व

NREGA व्यवहार में लागू करता है—

अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार)

अनुच्छेद 39(a) (आजीविका का अधिकार)

यह कानून भारतीय लोकतंत्र के सामाजिक-आर्थिक आधार को मजबूत करता है। 

3. MGNREGA, 2009

— नाम परिवर्तन, अधिकार वही

क्या हुआ?

-2 अक्टूबर 2009 को—

NREGA का नाम बदलकर रखा गया—

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA)

क्या नहीं बदला?

-अधिनियम वही

-अधिकार वही

-100 दिन की रोजगार गारंटी वही

-बेरोज़गारी भत्ता का प्रावधान वही

➡️ MGNREGA कोई नई योजना नहीं,

 बल्कि NREGA का ही नामांतर है।


नाम परिवर्तन का प्रतीकात्मक अर्थ

-गांधी का श्रम-दर्शन

-ग्राम स्वराज की अवधारणा

-श्रम की गरिमा पर जोर

परंतु कानूनी स्रोत अब भी NREGA अधिनियम ही है।

सीमाएँ (समय के साथ उभरीं)

-100 दिन कई परिवारों के लिए अपर्याप्त

-केवल अकुशल श्रम पर निर्भरता

-स्थायी आजीविका का अभाव

-यहीं से अगली पीढ़ी की सोच जन्म लेती है।

4. VB-G RAM G (2025)

— रोजगार से आगे, आजीविका की ओर

पूरा नाम

Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar & Ajeevika Mission (Gramin)

 (संक्षेप : VB-G RAM G)

—नया वैचारिक आधार

VB-G RAM G यह मानती है कि—

रोजगार का अंतिम उद्देश्य केवल मजदूरी नहीं,

 बल्कि सम्मानजनक और टिकाऊ आजीविका है।”

मुख्य विशेषताएँ (प्रस्तावित/उद्भवशील ढाँचा)

-रोजगार के दिनों में विस्तार

-आजीविका आधारित कार्य :

-कृषि-सहायक गतिविधियाँ

-जल-वन-भूमि प्रबंधन

-ग्रामीण उद्यमिता

-कौशल और उत्पादकता पर बल

-MGNREGA के ढाँचे पर आधारित, पर उससे आगे

  चिंता और बहस

-क्या रोजगार-गारंटी का कानूनी स्वरूप कमजोर होगा?

-क्या सबसे गरीब श्रमिक पीछे छूट सकता है?

-क्या राज्य की जिम्मेदारी कम होकर “मिशन” बन जाएगी?

➡️ VB-G RAM G की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि वह NREGA की कानूनी आत्मा को कितना सुरक्षित रख पाती है।

समग्र तुलनात्मक दृष्टि

चरण                 व्यवस्था              प्रकृति

SGRY             योजना           राहत आधारित

NREGA          अधिनियम       अधिकार आधारित

MGNREGA     नामांतर          अधिकार निरंतर

VB-G RAM G     मिशन        आजीविका आधारित

निष्कर्ष

भारत की ग्रामीण रोजगार नीति एक स्पष्ट विकासक्रम दिखाती है—

SGRY : भूख और बेरोज़गारी की पहचान

NREGA : रोजगार को कानूनी अधिकार बनाना

MGNREGA : उसी अधिकार को नैतिक-प्रतीकात्मक विस्तार

VB-G RAM G : रोजगार से आगे, आत्मनिर्भर आजीविका की खोज

परंतु अंतिम सत्य यही है—

आजीविका का भविष्य तभी सुरक्षित होगा,

 जब रोजगार का अधिकार सुरक्षित रहेगा।

यही भारतीय लोकतंत्र की कसौटी है।

सुरेश चौधरी

एकता हिबिसकस

56 क्रिस्टोफर रोड

कोलकाता 700046

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